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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

जीवन


जीवन

सुख एक सुनहला पंछी
ख्वाव उनींदी आंखों का
तृष्णा अतृप्त कंठों की......

कंटकित राह, अथाह चाह,
उस समग्र की
बूंद भर प्यास
क्षण भर आस

भर लेने को अथाह
सागर की वासना
लहूसिक्त चेहेरों पर ढांकें मुखोटे
छुपाये गरल
अदृश्य रगों में......।