माटी
सुनहली धूप
दरख्तों के साये से
ओंस की बूंदों से
कांटों के झुरमुट से
सागर के उन्मन से
देती है छुअन
माटी को.....
जीवन में स्वप्न का
सपने में जीवन का
अस्तित्व बचाने को ।
शीर्षक
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हिंदी है जन-जन की भाषा,हिंदी है भारत की आशा
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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
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