हिंदी है जन-जन की भाषा,हिंदी है भारत की आशा

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मंगलवार, 16 जून 2009

हिंदी है जन-जन की भाषा

हिंदी है जन-जन की भाषा
हिंदी है जीवन की भाषा
हिंदी है हर मन की आशा
हिंदी अपनेपन की भाषा

हिंदी बढती ही जायेगी
हिंदी जनता को जगाएगी
हिंदी को जो लहर आएगी
अंग्रेजी फिर कहाँ टिक पायेगी

आओ करें हिंदी का पूजन
हिंदी सीखे हिंद का हर जन
आओ करें अपना तन-मन-धन
हिंदी की सेवा में अर्पण

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छी शुरुआत की है राकेशजी आपने इस कविता के द्वारा. तारीफ एकाविल है. प्रयास जारी रखें.

    मनमोहन शर्मा

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