प्यारे हिन्दी को चाहने वाले भाइयों और बहनों,
हिन्दी ब्लॉग के क्षेत्र में यह मेरा नवीन प्रयास है। आज हम हिन्दी भाषियों की और हिन्दी इस उम्मीद से तक रही है कि हम हिन्दी की संतानें हिन्दी को विश्व में उचित स्थान दिलाएंगे। यह हमारा फ़र्ज़ भी बनता है। आज अगर हम हिन्दीभाषी ही हिन्दी का प्रयोग ना करेंगे तो हम दुसरे भाई बंधुओं से हिन्दी को सम्मान देने की बात कैसे सोच सकते हैं। कोई भी भाषा तभी आगे बढती है जब उसके प्रयोक्ता बन्धु भाषा को आगे बढ़ने की दिशा में दिलो-जान से प्रयास करते हैं। आइये, हिन्दी का प्रयोग करें, हिन्दी का सम्मान करें। हिन्दी केवल अपनी भाषा नही अपनी सामासिक संस्कृति का हिस्सा है। हिन्दी बढेगी हम बढ़ेंगे, हिन्दी बढेगी राष्ट्र बढेगा, हिन्दी बढेगी सम्मान बढेगा....
जय हिंद
जय हिन्दी
डॉ राकेश
शीर्षक
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- कहाँ स्लमडॉग हिंदी और कहाँ मिलियनारी अंग्रेजी (1)
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- कितना आज़ तृषित मन मेरा.... (1)
- कोई जूते से ना मारे मेरे दिवाने को (1)
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- गंगाधर मेहेर की दो कविताएँ (1)
- जीवन (1)
- पाकिस्तानी को हाकी क्यों मारी. (1)
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- बबुआ अर्जुन के साथ ओपनिंग करने का इरादा है का ..... (1)
- बहुत बदबख्त बशर तेरा दौरे-जमाँ निकला.... (1)
- माटी (1)
- मियां सचिन (1)
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- हिंदी (1)
- हॉकी और बाघ (1)
- Hindi (1)
हिंदी है जन-जन की भाषा,हिंदी है भारत की आशा
सुस्वागतम
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