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कहीं आपको नेटमानिया तो नहीं...
भारत जैसे देश में नेट का प्रयोग अभी विकासशील अवस्था में है फिर भी देश में ऐसे लोगों की तादात बढती जा रही है जिन्हें नेट की लत ने एक नशे का आदि सा बना दिया है । चौंकिए मत यह कोई आम बीमारी तो नहीं पर नेट का निरंतर उपयोग करनेवालों में यह बीमारी अब घर करने लगी है । तो आईए जरा खुद को भी इसके लक्षणों की कसौटी पर परख लें ।
निरंतर कंप्युटर से चिपके रहना, घंटो मित्रों की मेल का इंतजार करना और हर मेल को फारवर्ड़ करना, सर्च इंजनों की बिना बज़ह खाक छानना, सोशल साईट्स पर दिन भर चिपके रहना, चैटिं में अपना समय खराब करना और अगर कभी नेट कनेक्शन आदि में कोई दिक्कत आ जाए तो दिन भर डिप्रेशन या गुमसुम सा रहना, यह सब इसके लक्षण हैं । टी.वी के बाद अब कंप्युटर हमारी व्यक्तिगत ज़िंदगी पर हावी होता जा रहा है और इसका अभाव हमें नशे की अनुपलब्धता सी बैचेनी का एहसास कराता है । इस पर विकसित देशों में अनेक शोध हो चुके हैं और उनमें यह तथ्य सामने आया है कि नेट की अतिनिर्भरता भी मनुष्य को शराब या अन्य मादक पदार्थ सा व्यसनी बना सकती है । जिससे अवसाद, निराशा, अतिकाल्पनिकता, जैसे लक्षण उभर कर सामने आते हैं । पिछले दिनों यह भी एक खबर आई थी कि वर्चुअलवर्ल्ड नामक साईट पर एक जनाब ने किसी आभासी प्रेमिका से ऐसा वर्चुअल चक्कर चलाया कि परिणाम में रियल वाईफ से हाथ धोना पड़ा ।
अत: नेट का प्रयोग तो अतिआवश्यक और आधुनिक बनाता है परंतु इसका प्रयोग जरा संभल कर करें । इसे अपने वास्तविक जीवन पर हावी ना होनें दें । सप्ताह में एक-आध दिन नेट से दूर ही रहें । वर्ना नेटीजेन बनने का चक्कर कहीं आपकी खुशहाल जीवन पर ही असर ना डालना शुरु कर दे । हेप्पी ब्राउसिंग....
आप की बात से सहमत। आज कल यही देखने मे आ रहा है....दूसरो की क्या कहे कई बार हम भी इतना डूब जाते हैं ...घण्टे कब बीत जाते है पता नही लगता...अच्छी पोस्ट लिखी है...आभार।
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