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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010


प्रायश्चित

एक जुड़वां कन्या भ्रुण गर्भ में मार दी गई । दोनों की रुहें नर्क में पहुंची तो दोनों एक दूसरे को डबकोहीं आंखों से ताकने लगीं । पहली रुह बोली_ जनम लेकर वहां भी नरक देखना था शायद सो यहां ये नरक भोगने भेज दिया गया । दूसरी बोली पिछले जनम के सारे हिसाब-किताब चुकता कर ही मानुष जनम नसीब हुआ था और वहां भी जनम लेने से पहले ही हमारी औरत बिरादरी की पुत्र-लालसा के चलते हमारी जनम-नाल कटने से पहले हमें काट कर नालियों में बहा दिया गया । वो देख हमारी देह जो जोबन में किसी के सुख का माध्यम बनने के लिए गदराती आज उसके लोथडे़ आवार कुत्तों की भूख मिटा रहे हैं । पहली --- फरक क्या है, भूख ही तो मिटा रहे हैं, चाहे ऐसे चाहे वैसे । पहली- वो तो ठीक है पर पर एक बात तो समझ ना आई कि बिन जनम लिए बिन करम किए ये नरक किस पाप का दंड में भोगने भेज दिया घरमराज ने ! दूसरी- किसी के मां के गरभ में औरतजात के रूप में चार महीने काट लिए, किसी मां-बाप के बुढ़ापे के सहारे के अरमानों पर पानी फेर दिया, कितनी ही आंखों से पुत्र-पौत्र के सपने को आंसूओं से धो दिया, ये तो ऐसे पाप हैं कि हम सात नरक भोग लें तो भी प्रायश्चित ना हो...

दूसरी की आंखों की कुटिल मुस्कान अंतर की गहरी पीर की चुभती अभिव्यक्ति दे रही थी ।

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